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Friday, October 5, 2018

Root Chakra Activation Techniques - Mooladhara Chakra


Root Chakra is all About Our Earth Energies and Resposible For Relation, Finance Etc Issues.
In this Episode Monica Agarwal International Reiki Grandmaster Explains About Natural Ways of Activating Root Chakra.
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Monica Agarwal
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Saturday, August 11, 2018

Seven Chakras - How To Activate Them - Sound of Chakra - Chanting of Chakras


Monica Agarwal is An International Reiki Grandmaster and award winner celeb tarot reader.

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कैसे जाग्रत करें सातो चक्र?

भारतीय योग शास्त्र के अनुसार मानव शरीर में सात चक्र या शक्ति केन्द्र होते हैं।  आइए हम आपको बताते हैं इन सोए हुए चक्रों को जाग्रत करने का आसान तरीका और इससे होने वाले फायदे।

आधार चक्र: मूलाधार
मूलाधार चक्र को जगाने के लिए नियमित इस चक्र पर ध्यान लगाना चाहिए। ध्यान लगाते समय “लं” मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। इसके अलावा जीवन में अच्छे कर्मों पर ध्यान देना चाहिए। प्रतिदिन व्यायाम, योगा आदि करना चाहिए। इसे जाग्रत करने से व्यक्ति के भीतर वीरता, निर्भीकता और आनंद के भाव आते हैं।

स्वाधिष्ठान चक्र
दूसरा चक्र होता है स्वाधिष्ठान जो मूल से थोड़ा-सा ऊपर होता है। अगर इसे जागृत कर लिया जाए तो क्रूरता, गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, अविश्वास आदि दुर्गणों का नाश होता है। इस चक्र को जाग्रत करने के लिए घुटनों के बल सीधे बैठ जाएं और हाथों को अपने जांघों पर रखें। इसके बाद हथेलियों को आपस में एक गोले की तरह जोड़कर चक्र पर ध्यान लगाएं। इस योग के दौरान “वं” मंत्र का उच्चारण करते रहना चाहिए।


मणिपुर चक्र :
नाभि के पास मौजूद चक्र को मणिपुर चक्र कहते हैं।
इस चक्र को जाग्रत करने के लिए घुटने के बल बैठकर हाथों को पेट के पास ले जाकर नमस्कार की मुद्रा में बैठ जाएं। इसके बाद मन ही मन “रं” मंत्र का जाप करते हुए चक्र पर ध्यान लगाना चाहिए।

अनाहत चक्र
हृदय स्थल में स्थित होता है अनाहत चक्र । दिल के पास रहने वाले इस चक्र के प्रभाव से मनुष्य में कला का गुण आता है। ऐसे लोग हमेशा कुछ नया करने की कोशिश करते रहते हैं। इस चक्र को जगाने के लिए योग की मुद्रा में बैठ जाएं और अंगूठे से तर्जनी ऊंगली को छूएं। अब एक हाथ को हृदय पर रखें और एक  हाथ को जांघों पर रखे रहें। मन ही मन “यं” मंत्र का जाप करते रहना चाहिए।


विशुद्ध चक्र
यह चक्र गले पर होता है जहां वाणी की देवी मां सरस्वती का वास माना जाता  है। इसके जाग्रत होने से मनुष्य में सोलह कलाओं को ग्रहण करने की क्षमता बढ़ जाती है साथ ही मनुष्य पर भूख, प्यास और मौसम के प्रभाव बेहद कम होता है।
इस चक्र को जागृत करने के लिए घुटनों के बल बैठकर दोनों हाथों को जोड़ें और फिर गले के अंत में विद्यमान इस चक्र पर ध्यान लगाएं। ध्यान के दौरान “हं” मंत्र का जाप करते रहना चाहिए।


आज्ञाचक्र
दोनों भौहों के बीच स्थित चक्र को आज्ञाचक्र कहते हैं। इसे बेहद विकसित शक्ति चक्र माना जाता है। इस चक्र को जाग्रत करने के लिए काफी ध्यान और अभ्यास की आवश्यकता होती है। इसके लिए आसन लगाकर शांत स्थान पर बैठ जाना चाहिए और अपनी तीसरी आंख पर ध्यान लगाना चाहिए। योग के दौरान “ऊं” मंत्र का जाप करते रहना चाहिए।

सहस्रार चक्र (pronounce as sahastrar)
मस्तिष्क के मध्य भाग में है अर्थात जहां चोटी रखते हैं वहां सहस्त्रार चक्र होता है। यह चक्र सबसे शक्तिशाली माना जाता है। इसे प्राप्त मनुष्य के लिए संसारिक वस्तुओं का कोई मोल नहीं होता है।

इस चक्र को जाग्रत करने का सर्वोत्तम तरीका होता है किसी गुरु की सहायता से योग करना। गुरु या किसी निरीक्षक की देखरेख में यह योग करने से काफी लाभ होता है। सहस्त्रार चक्र ही नहीं अपितु सभी चक्रों को पाने या जाग्रत करने के लिए गुरु की सहायता लेना लाभदायक होता है।